Major changes await the UP BJP, with the state organization and six regional presidents set to be replaced.
उत्तर प्रदेश में BJP organizational restructuring की प्रक्रिया तेज हो गई है। आगामी UP Assembly Election 2027 (Mission 2027) को ध्यान में रखते हुए पार्टी नेतृत्व जल्द ही प्रदेश संगठन में बड़े बदलाव कर सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश टीम (State BJP Organization) के साथ-साथ पार्टी के सभी छह Regional Presidents को बदलने की तैयारी चल रही है। संगठन में यह बदलाव जिला इकाइयों के गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद घोषित किया जा सकता है।
जिलों से लेकर प्रदेश स्तर तक चल रही पुनर्गठन प्रक्रिया
प्रदेश में भाजपा का संगठनात्मक ढांचा 1918 मंडलों, 98 संगठनात्मक जिलों और 6 क्षेत्रों में विभाजित है।
मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति लगभग पूरी हो चुकी है और अब केवल 70-75 मंडल अध्यक्षों की घोषणा बाकी है। वहीं 94 नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है।
फिलहाल वाराणसी, चंदौली, देवरिया और अंबेडकर नगर जैसे कुछ जिलों में जिलाध्यक्ष घोषित होने बाकी हैं। इन पदों के लिए भी प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है।
संगठन की नई संरचना तय करने के लिए नियुक्त observers (पर्यवेक्षक) जिला स्तर पर रायशुमारी पूरी कर चुके हैं और अगले 48 घंटे में रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंप सकते हैं। इसके बाद regional meetings का दौर शुरू होने की संभावना है।
क्षेत्रीय अध्यक्षों के खिलाफ शिकायतें भी बनी वजह
पार्टी सूत्रों के अनुसार कई Regional Presidents के खिलाफ नेतृत्व के पास गंभीर शिकायतें पहुंची हैं। इनमें लेनदेन के आरोप, पक्षपात और अपने करीबी नेताओं को बढ़ावा देने जैसी बातें शामिल हैं।
कुछ मामलों में यह भी आरोप लगा है कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई, जिससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा।
इसी वजह से पार्टी नेतृत्व अब organizational accountability को मजबूत करने के लिए नए चेहरों को मौका देने पर विचार कर रहा है।
विधान परिषद की परंपरा से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
बीते कुछ वर्षों में भाजपा में यह परंपरा बनती दिखाई दी है कि Regional Presidents को बाद में Legislative Council (MLC) भेजा जाता है।
इस वजह से यह पद राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जाने लगा है और संगठन में इस पद के लिए प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है।
कुर्सी बचाने की कोशिश में जुटे नेता
सूत्रों के मुताबिक संभावित बदलाव की खबरों के बीच कई Regional Presidents अपनी कुर्सी बचाने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ नेता वरिष्ठ नेताओं और RSS पदाधिकारियों से सिफारिश कराने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा कई जगह धार्मिक अनुष्ठान और ज्योतिषीय सलाह लेने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।
Social Engineering पर रहेगा BJP का फोकस
Mission 2027 को देखते हुए भाजपा का फोकस इस बार Social Engineering strategy पर ज्यादा है।
पार्टी नेतृत्व चाहता है कि क्षेत्रीय नेतृत्व में उन जातीय और सामाजिक वर्गों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए, जो हाल के चुनावों में पार्टी से कुछ हद तक दूर होते दिखाई दिए।
इस रणनीति के जरिए भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए संतुलित और व्यापक सामाजिक समीकरण तैयार करना चाहती है।