LEMOA Agreement: क्या अमेरिका भारत के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल हमले के लिए कर सकता है?

Iran-US conflict के बीच एक नया सवाल चर्चा में है कि क्या अमेरिका भारत के military bases का इस्तेमाल किसी सैन्य कार्रवाई के लिए कर सकता है। यह बहस उस समय तेज हुई जब IRIS Dena युद्धपोत के डूबने की घटना के बाद सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिका भारतीय बेस पर निर्भर हो सकता है। हालांकि इन दावों को आधिकारिक तौर पर खारिज किया गया है।

असल में भारत और अमेरिका के बीच Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) नाम का एक रक्षा समझौता मौजूद है, जिसे लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि यह समझौता क्या है और इसके तहत अमेरिका को क्या अधिकार मिलते हैं।

क्या है LEMOA Agreement?

भारत और अमेरिका ने 29 अगस्त 2016 को Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता अमेरिका की राजधानी Washington DC में हुआ था।

यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं के बीच logistic support, supplies और services के लिए नियम तय करता है। दरअसल, यह अमेरिका द्वारा कई देशों के साथ किए गए Logistics Support Agreement (LSA) का भारतीय संस्करण माना जाता है।

इस समझौते के तहत दोनों देश जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की naval bases, airfields और military facilities का उपयोग कर सकते हैं।

समझौते के तहत क्या सुविधाएं मिलती हैं?

LEMOA के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का उपयोग कर सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:

Refuelling services

Maintenance और repair support

Logistics supply

सैन्य उपकरणों के लिए जरूरी सामान

हालांकि इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि हर बार prior permission यानी पहले से अनुमति लेना जरूरी होता है। इसका मतलब यह है कि किसी भी सुविधा का इस्तेमाल बिना सरकार की मंजूरी के नहीं किया जा सकता।

किन गतिविधियों में लागू होता है यह समझौता?

LEMOA Agreement मुख्य रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों में लागू होता है:

Port Calls – यानी नौसेना के जहाजों का बंदरगाहों पर रुकना

Joint Military Exercises – संयुक्त सैन्य अभ्यास

Training Programs – सैन्य प्रशिक्षण

Humanitarian Assistance and Disaster Relief (HADR)

इसके अलावा अगर किसी अन्य उद्देश्य के लिए इन सुविधाओं का उपयोग करना हो तो दोनों देशों की mutual consent यानी आपसी सहमति जरूरी होती है।

लॉजिस्टिक सपोर्ट में क्या-क्या शामिल है?

इस समझौते के तहत मिलने वाली logistic services में कई तरह की सुविधाएं शामिल हैं, जैसे:

भोजन और पानी

आवास व्यवस्था

परिवहन

Petroleum, oil and lubricants (POL)

संचार सेवाएं

चिकित्सा सेवाएं

उपकरणों की मरम्मत और रखरखाव

स्पेयर पार्ट्स और स्टोरेज

प्रशिक्षण और पोर्ट सेवाएं

इन सेवाओं के बदले संबंधित देश को या तो payment करना होता है या फिर समान प्रकार की लॉजिस्टिक सेवाएं प्रदान करनी होती हैं।

क्या अमेरिका भारत से हमला कर सकता है?

LEMOA Agreement को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका भारतीय military bases का इस्तेमाल किसी सैन्य हमले के लिए कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस समझौते में permanent military base बनाने या किसी भी देश को भारत से सैन्य कार्रवाई करने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है। यह पूरी तरह से logistics agreement है।

इसके अलावा भारत की नीति भी स्पष्ट है कि वह किसी भी देश को अपने सैन्य ठिकानों का उपयोग offensive military operations के लिए नहीं करने देगा।

IRIS Dena घटना भारत के लिए क्यों अहम?

IRIS Dena warship की घटना इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि यह हिंद महासागर के उस क्षेत्र में हुई जो भारत के strategic maritime neighbourhood में आता है।

Indian Ocean का यह इलाका वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के प्रमुख समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव maritime security और shipping routes को प्रभावित कर सकता है।

गौरतलब है कि ईरानी युद्धपोत Dena फरवरी में भारत में आयोजित MILAN Naval Exercise में हिस्सा लेने आया था। यह अभ्यास 18 से 25 फरवरी के बीच हुआ था, जिसमें कई देशों की नौसेनाओं ने भाग लिया था और 80 से अधिक युद्धपोत शामिल हुए थे।

भारत की क्या है आधिकारिक नीति?

रक्षा विशेषज्ञ Captain DK Sharma के अनुसार यह जहाज भारत के निमंत्रण पर आया था, लेकिन घटना के समय वह भारत की territorial waters से बाहर जा चुका था। इसलिए इस घटना के लिए सीधे तौर पर भारत को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक भारत की नीति साफ है कि वह अपने किसी भी military base का इस्तेमाल किसी दूसरे देश को हमले के लिए करने की अनुमति नहीं देगा।