भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा: 114 राफेल खरीद में 3.25 लाख करोड़ का निवेश

नई दिल्ली: France-India Defence Cooperation में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron की भारत यात्रा से पहले ही भारतीय रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी। सौदे की कुल अनुमानित कीमत ₹3.25 लाख करोड़ है। अगले कुछ महीनों में इस Rafale Defence Deal पर औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं।

राफेल विमानों की डिलीवरी और उत्पादन

प्रस्तावित सौदे के तहत 18 विमान सीधे फ्रांस से “Ready to Fly” स्थिति में भारत आएंगे।

बाकी विमानों का संयुक्त उत्पादन (Joint Production) भारत में किया जाएगा।

भारत में बने राफेल विमानों में 40-50% सामग्री स्वदेशी (Indigenous) होगी, जिससे भारत में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान निर्माण का Defence Ecosystem तैयार होगा।

भविष्य में भारत में बने राफेल विमानों का Export Potential भी होगा।

भारतीय वायुसेना और राफेल का प्रदर्शन

भारतीय वायुसेना के बेड़े में 36 राफेल विमान पहले से हैं।

मई में Operation Sindur के दौरान इन विमानों ने अपनी क्षमता साबित की।

फ्रांस समेत 10 से अधिक देशों ने राफेल को अपनी वायुसेना में शामिल किया या खरीद आदेश दिए हैं।

रख-रखाव और इंफ्रास्ट्रक्चर

राफेल के Engines बनाने वाली कंपनी Safran हैदराबाद में MRO Facility तैयार कर रही है।

इसका मतलब: राफेल इंजन को ओवरहाल करने के लिए अब भारत को फ्रांस ले जाने की जरूरत नहीं।

पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षण के कारण Maintenance और Pilot Training आसान हो जाएगा।

क्यों चुना भारत ने फ्रांस को?

Platform Usage Flexibility: फ्रांस अपने हथियारों पर शर्तें नहीं लगाता कि उन्हें किसके खिलाफ इस्तेमाल किया जाए।

Strategic Autonomy: भारत को किसी तीसरे देश की नीति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

Reliability: फ्रांस भारत के लिए भरोसेमंद रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है, 1980 में मिराज-2000 के जरिए यह साबित हो चुका है।

Diversity in Defence Procurement: रूस, अमेरिका, इजरायल और फ्रांस से विभिन्न हथियार खरीदकर भारत अपनी रक्षा जरूरतों में Diversification सुनिश्चित कर रहा है।

भू-राजनीतिक संकेत

फ्रांस भारत के लिए पश्चिमी दुनिया का भरोसेमंद रूस (Reliable Western Russia) है।

वैश्विक परिदृश्य में भारत अपनी Defence Independence और Strategic Autonomy को मजबूत कर रहा है।

यह सौदा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देगा और रक्षा उत्पादन में High-Technology Hub बनने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।