महाशिवरात्रि पर क्यों उमड़ती है दक्षेश्वर महादेव मंदिर में आस्था की सबसे बड़ी भीड़?

Mahashivratri festival के पावन अवसर पर हरिद्वार की धर्मनगरी में सुबह से ही Shiva devotees मंदिरों में दर्शन और jalabhishek के लिए कतारों में खड़े दिखाई दिए। कनखल स्थित प्राचीन Daksheshwar Mahadev Temple में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई, जहां भक्तों ने milk abhishek, belpatra offering और Shiv worship rituals के माध्यम से सुख-समृद्धि की कामना की।

मान्यता है कि Mahashivratri के दिन भगवान शिव और माता सती का विवाह हुआ था। इस दिन सच्चे मन से की गई Lord Shiva worship से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि इस अवसर पर मंदिरों में spiritual tourism और religious gathering का विशेष माहौल दिखाई देता है।

पौराणिक कथा से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

दक्षेश्वर महादेव मंदिर का संबंध King Daksha Prajapati और Mata Sati की पौराणिक कथा से माना जाता है। कथा के अनुसार, राजा दक्ष ने एक विशाल yagya ceremony आयोजित की थी, जिसमें भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया। जब माता सती वहां पहुंचीं और भगवान शिव का अपमान देखा, तो उन्होंने यज्ञ कुंड में कूदकर self-sacrifice कर लिया।

इस घटना से क्रोधित होकर भगवान शिव ने Veerbhadra को उत्पन्न किया, जिसने यज्ञ का विध्वंस कर दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। बाद में भगवान शिव ने बकरे का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया और स्वयं Shivling रूप में वहां स्थापित हो गए। तभी से यह स्थान Hindu mythology pilgrimage site के रूप में प्रसिद्ध है।

मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्थाएं कड़ी

महाशिवरात्रि पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए Haridwar Police Administration ने security arrangements मजबूत किए हैं।
शहर के अन्य प्रमुख शिवालयों जैसे तिल भांडेश्वर मंदिर, बिल्केश्वर महादेव मंदिर और नीलेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं।

श्रद्धालु Gangajal, milk, honey, dahi, bhang, dhatura और bel leaves अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। माना जाता है कि यहां पूजा करने से prosperity, peace and spiritual growth की प्राप्ति होती है।