लोक निर्माण विभाग रहा बेखबर, समाजसेवी टीम ने सड़क को बनाया सुरक्षित

उत्तराखंड के कालाढूंगी क्षेत्र में एक बार फिर आम लोगों ने वह काम कर दिखाया, जो जिम्मेदार विभाग को करना चाहिए था। रामनगर-हल्द्वानी हाईवे पर लंबे समय से बने खतरनाक गड्ढों से परेशान होकर समाजसेवी राहुल सिंह दरम्वाल और उनकी टीम खुद सड़क पर उतर आई और उन्होंने गड्ढों को भरकर रास्ते को सुरक्षित बनाने की पहल की।

यह कदम सिर्फ सड़क सुधारने की कोशिश नहीं था, बल्कि यह उस लापरवाही के खिलाफ एक सीधा संदेश भी था, जिसके कारण आए दिन road accident risk बढ़ता जा रहा था।

बैलपड़ाव के पास जानलेवा बन चुके थे गड्ढे

गुरुवार को बैलपड़ाव के पास हाईवे पर मौजूद गहरे और खतरनाक potholes को टीम ने भरने का काम किया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह हिस्सा लंबे समय से दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा था।

सड़क पर बने इन गड्ढों की वजह से न सिर्फ वाहन चालकों को दिक्कत हो रही थी, बल्कि दोपहिया वाहन सवारों और रात के समय गुजरने वाले यात्रियों के लिए यह जगह बेहद खतरनाक बन चुकी थी।

हाईवे पर सफर करने वाले लोगों का कहना है कि इन गड्ढों के कारण अचानक वाहन असंतुलित हो जाते हैं, जिससे गंभीर हादसों की आशंका बनी रहती है।

कई बार की शिकायत, लेकिन विभाग ने नहीं लिया एक्शन

समाजसेवी राहुल सिंह दरम्वाल ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग (PWD) से संपर्क किया और सड़क की मरम्मत की मांग की।

लेकिन बार-बार गुहार लगाने के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

जब हालात लगातार बिगड़ते गए और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता गया, तब उन्होंने और उनकी टीम ने इंतजार छोड़कर खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया।

यह मामला स्थानीय स्तर पर public action vs departmental negligence की एक बड़ी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

हादसों का बढ़ता खतरा बना चिंता की वजह

स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर बने गड्ढों की वजह से कई छोटे-बड़े हादसे पहले भी हो चुके हैं।

बारिश, धूल और तेज रफ्तार वाहनों के बीच ये गड्ढे और भी ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। खासकर बाइक और स्कूटी सवारों के लिए यह सड़क का हिस्सा बेहद जोखिम भरा माना जा रहा था।

लगातार हो रही दुर्घटनाओं में लोगों के घायल होने और जान जाने की घटनाओं ने क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी थी।

इसी वजह से समाजसेवी टीम ने इसे सिर्फ सड़क की समस्या नहीं, बल्कि human safety issue मानते हुए खुद पहल की।

सुरक्षित सफर के लिए खुद उठाया जिम्मेदारी का बोझ

राहुल सिंह दरम्वाल और उनकी टीम ने जिस तरह से खुद आगे आकर गड्ढों को पाटा, उसे स्थानीय लोग सराहनीय पहल मान रहे हैं।

अक्सर लोग सरकारी कार्रवाई का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन यहां युवाओं और समाजसेवियों ने यह दिखाया कि अगर जिम्मेदारी की भावना हो, तो छोटे स्तर पर भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

हालांकि, यह सवाल भी उतना ही बड़ा है कि आखिर जनता को खुद सड़कें ठीक करने की नौबत क्यों आए?

सड़क मरम्मत के दौरान इन लोगों ने दिया सहयोग

इस अभियान के दौरान कई स्थानीय युवाओं और सहयोगियों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

इस काम में

कमल रावत
कुलदीप बिष्ट
केशव बिष्ट
सौरभ छिमवाल
विशाल रावत
करन नेगी
गुड्डू अधिकारी

ने मिलकर सहयोग किया।

टीमवर्क और सामुदायिक भागीदारी की यह मिसाल अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

सवाल बरकरार: क्या जिम्मेदार विभाग अब जागेगा?

इस पूरी घटना ने एक बार फिर road maintenance, public safety और government accountability जैसे बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब किसी हाईवे पर गड्ढे इतने खतरनाक हो जाएं कि लोग खुद उन्हें भरने निकल पड़ें, तो यह सिर्फ एक सड़क की कहानी नहीं रह जाती — यह सिस्टम की सुस्ती और जिम्मेदारी की कमी की भी कहानी बन जाती है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या संबंधित विभाग इस पहल के बाद सड़क की स्थायी मरम्मत करेगा या फिर हालात दोबारा वैसे ही हो जाएंगे।

जब सिस्टम चुप रहा, तब समाज आगे आया

कालाढूंगी में समाजसेवी राहुल सिंह दरम्वाल और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया कि जागरूक नागरिक चाहें तो बदलाव की शुरुआत खुद कर सकते हैं।

लेकिन यह भी सच है कि Highway Safety, Pothole Repair और Public Infrastructure जैसी जिम्मेदारियां आम लोगों की नहीं, बल्कि प्रशासन और विभागों की होती हैं।

इस घटना ने एक तरफ समाज की संवेदनशीलता दिखाई, तो दूसरी तरफ सिस्टम की निष्क्रियता को भी उजागर कर दिया।