Census Act 1948 पर जारी सर्कुलर में सख्ती, जनता और कर्मचारियों दोनों के लिए बनाए गए स्पष्ट नियम

जनगणना 2027 को पारदर्शी, व्यवस्थित और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत के महापंजीयक (Registrar General of India) की ओर से जारी सर्कुलर में साफ कर दिया गया है कि जनगणना कार्य में लगे अधिकारी-कर्मचारी, सहयोगी स्टाफ और आम जनता—सभी की जवाबदेही तय होगी।

अगर कोई कर्मचारी या अधिकारी अपने कर्तव्य में लापरवाही, नियमों का उल्लंघन, गलत जानकारी, दस्तावेजों से छेड़छाड़ या गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करता है, तो उसके खिलाफ जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। वहीं, आम नागरिकों के लिए भी सहयोग न करने या गलत जानकारी देने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

उत्तराखंड में 10 अप्रैल से शुरू होगी स्वगणना

पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना की प्रक्रिया शुरू

जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण (House Listing) और मकानों की गणना (Housing Census) का कार्य कई राज्यों में शुरू हो चुका है।
वहीं, उत्तराखंड में यह प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 से स्वगणना (Self Enumeration) के साथ शुरू होगी।

राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
इसके तहत लोग तय समय के भीतर स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज करा सकेंगे।

उत्तराखंड में 3 चरणों में होगी जनगणना

पहले घरों की गिनती, फिर हिम क्षेत्र और अंत में बाकी इलाकों में जनसंख्या गणना जहां देश के अधिकांश राज्यों में जनगणना दो चरणों में होगी, वहीं उत्तराखंड में यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी कराई जाएगी।

उत्तराखंड में जनगणना 2027 का पूरा शेड्यूल:
पहला चरण
10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026
स्वगणना (Self Enumeration) की सुविधा उपलब्ध रहेगी
25 अप्रैल से 24 मई 2026
मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य होगा
दूसरा चरण
1 सितंबर से 30 सितंबर 2026
हिम आच्छादित (Snow-bound) क्षेत्रों में लोगों की गणना की जाएगी
तीसरा चरण
9 फरवरी से 28 फरवरी 2027
राज्य के अन्य सभी क्षेत्रों में जनसंख्या गणना होगी
महापंजीयक ने जारी किया सर्कुलर
जनगणना शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और कानूनी रूप से मजबूत तरीके से कराने पर जोर

भारत के महापंजीयक की ओर से सभी राज्यों के जनगणना निदेशालयों को Census Act, 1948 के तहत एक विस्तृत सर्कुलर भेजा गया है।

इस सर्कुलर का मुख्य उद्देश्य है:

जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करना
जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना
और पूरी प्रक्रिया को कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाना

यानी अब जनगणना को सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कानूनी रूप से नियंत्रित और जवाबदेह अभियान के रूप में चलाया जाएगा।

अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए सख्त नियम

कर्तव्य में लापरवाही, गलत जानकारी और गोपनीयता भंग करने पर होगी कार्रवाई

जारी सर्कुलर के अनुसार, अगर कोई जनगणना अधिकारी, कर्मचारी, संकलक, छंटाईकर्ता (Sorter) या अन्य चयनित व्यक्ति निम्न में से कोई गलती करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है:

किस स्थिति में कर्मचारी/अधिकारी पर कार्रवाई होगी?
अपने कर्तव्यों का पालन करने से इनकार करना
झूठी जानकारी तैयार करना
दूसरे कर्मचारियों को काम करने से रोकना
सरकार की अनुमति के बिना गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करना
जनगणना दस्तावेज छिपाना, हटाना, नुकसान पहुंचाना या नष्ट करना
ऐसा व्यवहार करना जिससे जनगणना परिणाम प्रभावित हो सकते हों
जानबूझकर अपमानजनक या अनुचित सवाल पूछना
जानबूझकर गलत विवरण दर्ज करना
किसी भी जनगणना रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करना
दोष सिद्ध होने पर 3 साल तक की जेल
कानून तोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए कारावास और जुर्माने दोनों का प्रावधान

अगर जनगणना से जुड़े किसी अधिकारी या कर्मचारी पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं, तो उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

संभावित सजा:
कारावास (जेल)
जुर्माना
या दोनों

कुछ गंभीर मामलों में 3 साल तक की सजा का भी प्रावधान बताया गया है।

यानी अब जनगणना के दौरान कोई भी कर्मचारी “सिर्फ प्रशासनिक गलती” कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच पाएगा।

धारा 7A और 7G के उल्लंघन पर भी सजा
आदेश न मानने पर 1 साल तक की जेल या जुर्माना

सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति:

धारा 7A (जनगणना के लिए परिसरों/वाहनों के अधिग्रहण से जुड़े आदेश)
या धारा 7G (जानकारी प्राप्त करने की शक्ति)

के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

इस स्थिति में सजा:
1 साल तक की जेल
या जुर्माना
या दोनों
आम जनता के लिए भी बने नियम

गलत जानकारी, जवाब देने से इनकार या सहयोग न करने पर लगेगा जुर्माना

जनगणना अधिनियम के तहत सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी कुछ स्पष्ट जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

अगर कोई नागरिक जनगणना के दौरान सहयोग नहीं करता, तो उस पर भी कार्रवाई हो सकती है।

किन स्थितियों में आम नागरिक पर कार्रवाई हो सकती है?
जनगणना कर्मचारी के वैध सवालों का गलत जवाब देना
जवाब देने से इनकार करना
जनगणना कर्मचारी को घर में प्रवेश न देना
घर के बाहर जनगणना के लिए लिखे गए अंक/चिह्न हटाना या बदलना
गलत जानकारी देना
जनगणना कार्यालय में बिना अनुमति प्रवेश करना

आम नागरिकों पर कितना जुर्माना लगेगा?

1000 रुपये तक का जुर्माना तय

यदि कोई व्यक्ति ऊपर बताए गए नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ:

1000 रुपये तक का जुर्माना

लगाया जा सकता है।

हालांकि, यह जुर्माना गंभीर आपराधिक सजा जैसा नहीं है, लेकिन इससे यह साफ हो जाता है कि सरकार इस बार जनगणना में नागरिक सहयोग को भी अनिवार्य रूप से देख रही है।

जनगणना डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय
कोई भी व्यक्ति रजिस्टर, रिकॉर्ड या शेड्यूल देखने का हकदार नहीं होगा

सर्कुलर में डेटा गोपनीयता (Data Confidentiality) को लेकर भी बड़ा प्रावधान किया गया है।

इसके अनुसार:

किसी भी व्यक्ति को जनगणना अधिकारी द्वारा तैयार की गई पुस्तक, रजिस्टर या रिकॉर्ड देखने का अधिकार नहीं होगा
धारा 10 के तहत भरी गई किसी अनुसूची (Schedule) का निरीक्षण भी कोई नहीं कर सकेगा

यानी जनगणना में दी गई व्यक्तिगत जानकारी को सख्त गोपनीय रखा जाएगा।

कोर्ट में भी इस्तेमाल नहीं होगा जनगणना डेटा

नागरिक और आपराधिक मामलों में census records को साक्ष्य नहीं बनाया जा सकेगा

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई जानकारी को आमतौर पर किसी भी civil या criminal proceeding में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

यानी:

आपकी जनगणना में दी गई जानकारी
किसी मुकदमे
पुलिस जांच
या अदालत की सामान्य कार्यवाही

में सीधे तौर पर इस्तेमाल नहीं की जा सकेगी, सिवाय उन मामलों के जहां खुद जनगणना अधिनियम के उल्लंघन का मामला हो।

यह प्रावधान लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

सरकार का मकसद क्या है?

सटीक, पारदर्शी और भरोसेमंद जनगणना कराना

इन सख्त नियमों और कानूनी प्रावधानों का मकसद साफ है:

सही और विश्वसनीय डेटा जुटाना
कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना
जनता का सहयोग सुनिश्चित करना
और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व सुरक्षित बनाना

क्योंकि जनगणना सिर्फ जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं, बजट, संसाधन वितरण और नीतियों की बुनियाद भी होती है।

जनगणना 2027 में अब लापरवाही की गुंजाइश कम, नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

जनगणना 2027 को लेकर जारी नए निर्देशों ने यह साफ कर दिया है कि इस बार सरकार पूरी प्रक्रिया को जवाबदेह, कानूनी और अनुशासित ढंग से लागू करना चाहती है।

चाहे अधिकारी-कर्मचारी हों या आम नागरिक—गलत जानकारी, सहयोग न करना, दस्तावेजों से छेड़छाड़ या गोपनीयता भंग जैसी किसी भी लापरवाही पर अब जेल और जुर्माने दोनों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आने वाली जनगणना सिर्फ एक प्रशासनिक अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की सख्त कानूनी प्रक्रिया के रूप में सामने आ रही है।