New government scheme: Every gold ornament will get a unique identification number
सरकार ने सोने की शुद्धता में धोखाधड़ी रोकने के लिए हॉलमार्किंग व्यवस्था को और सख्त करने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत अब हर गहने को अलग पहचान संख्या (Unique ID) दी जाएगी, जो सिर्फ उसी गहने के लिए होगी और दोबारा किसी दूसरे गहने पर इस्तेमाल नहीं हो सकेगी।
क्यों ज़रूरी?
कुछ मामलों में एक ही हॉलमार्क नंबर कई गहनों पर इस्तेमाल हो रहा था।
इससे ग्राहक को असली शुद्ध सोना मिलने में परेशानी होती थी।
धोखाधड़ी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह कदम जरूरी है।
नई व्यवस्था का फायदा
हर गहने की अलग पहचान – डिजाइन, आकार और विशेषताओं के आधार पर नंबर मिलेगा।
दोबारा इस्तेमाल नहीं – पुराने गहनों का नंबर किसी नए गहने पर नहीं लगेगा।
ऑनलाइन जानकारी – ग्राहक नंबर डालते ही गहने की शुद्धता, वजन, ज्वैलर और हॉलमार्क केंद्र की जानकारी देख पाएंगे।
नकली और कम शुद्धता वाले गहनों पर रोक – हॉलमार्क चोरी, नकल और गलत इस्तेमाल पर नियंत्रण।
पहले 25 जिलों में सफल परीक्षण
इस नई व्यवस्था का परीक्षण पहले 25 जिलों में किया गया, जिसमें गहनों की फोटो, वजन और अन्य जानकारी ऑनलाइन दर्ज की गई। यह प्रयोग सफल रहा।
वर्तमान स्थिति
भारत में हॉलमार्किंग 2000 में शुरू हुई, 2021 से अनिवार्य।
लगभग 400 जिलों में हॉलमार्किंग लागू है।
अब तक 58 करोड़ से अधिक गहनों पर हॉलमार्क लगाया जा चुका है।
मुख्य बात: अब ग्राहक खास नंबर के जरिए आसानी से पहचान सकेंगे कि गहना असली है या नकली, और उसकी शुद्धता कितनी है।