Financial Mismanagement या Organized Scam? 2014-2025 के Transactions की होगी जांच

देहरादून स्थित Doon Urban Cooperative Bank (DUCB) में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले के खुलासे के बाद अब मामले की Forensic Audit कराई जाएगी। Reserve Bank of India (RBI) और Urban Cooperative Banking Authorities ने संयुक्त रूप से यह निर्णय लिया है।

RBI ने बैंक के लेन-देन (Banking Transactions) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस कार्रवाई के चलते करीब 9,000 ग्राहकों के लगभग 124 करोड़ रुपये फंसे होने के दावे सामने आए हैं। खाताधारकों के विरोध और हंगामे के बाद मामले की गहन जांच का फैसला लिया गया।

2014 से 2025 तक के Transactions की होगी जांच

बैंक के सचिव बलबीर सिंह के अनुसार, यह जांच सामान्य ऑडिट से अलग होगी। Forensic Audit के तहत RBI द्वारा चयनित Chartered Accountant (CA) या अन्य सक्षम अधिकारी पूरे मामले की तह तक जाएंगे।

जांच टीम 2014 से 2025 तक के सभी प्रमुख वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) की पड़ताल करेगी। इसमें Money Trail, Loan Sanction Process, Documentation Verification और Fund Flow Analysis शामिल होंगे।

यह जांच की जाएगी कि बैंक में पैसा कहां से आया और किन खातों में ट्रांसफर हुआ। जिन लोगों को लोन दिया गया, उनके द्वारा जमा किए गए दस्तावेज असली थे या फर्जी (Fake Documents) – इसकी भी जांच होगी।

Bank Manager की भूमिका भी जांच के दायरे में

Public Funds के कस्टोडियन के रूप में बैंक मैनेजर की भूमिका अहम मानी जाती है। Forensic Team बैंक मैनेजर से विस्तृत जानकारी और जरूरी दस्तावेज हासिल करेगी।

यह भी देखा जाएगा कि किन लोगों को Loan Approval दिया गया और क्या Internal Control Mechanism के तहत गड़बड़ियों को रोकने के प्रयास किए गए थे या नहीं।

9,000 खाताधारक प्रभावित, 124 करोड़ रुपये अटके

बैंक में सिर्फ आम उपभोक्ताओं ही नहीं, बल्कि शहर के नामी स्कूल, नगर निगम के A-Grade Contractors और Builders की भी रकम फंसी हुई है।

बताया जा रहा है कि करीब 30 करोड़ रुपये नगर निगम के ठेकेदारों के अटके हुए हैं, जिससे Development Projects प्रभावित हो सकते हैं।

कई खाताधारक शादी, इलाज और अन्य जरूरी खर्चों के लिए अपना पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं। इससे Banking Governance और Regulatory Oversight पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

शिकायतें होती रहीं, कार्रवाई नहीं हुई

शेयर होल्डरों और खाताधारकों का दावा है कि पिछले 10 वर्षों में शासन-प्रशासन और RBI को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन समय रहते जांच नहीं हुई।

समय पर Regulatory Action न होने के कारण अब हजारों परिवार आर्थिक संकट (Financial Crisis) का सामना कर रहे हैं।

रिश्तेदारों की भर्ती और Hiring Irregularities के आरोप

शेयर होल्डर संजीव वर्मा ने आरोप लगाया है कि बैंक में रिश्तेदारों और करीबियों को नौकरी देकर Hiring Process में अनियमितताएं की गईं।

उनका कहना है कि बैंक मैनेजर और जूनियर मैनेजर जैसे पदों पर पारदर्शी प्रक्रिया (Transparent Recruitment Process) का पालन नहीं किया गया। सहकारिता एक्ट (Cooperative Act) के तहत सेवायोजना विभाग के माध्यम से नियुक्तियां होनी थीं, लेकिन कथित रूप से नियमों की अनदेखी की गई।

उन्होंने मांग की है कि DUCB को किसी मजबूत बैंक में Merge किया जाए ताकि खाताधारकों का पैसा सुरक्षित हो सके।

RBI Audit पर भी उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में यह सवाल भी उठ रहा है कि RBI के नियमित ऑडिट (Regular Banking Audit) में यह घोटाला पहले क्यों नहीं पकड़ में आया।

खाताधारक और शेयर होल्डर पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर सख्त निगरानी होती तो आज हजारों लोग Financial Distress का सामना नहीं करते।

Doon Urban Cooperative Bank Case अब Banking Regulation, Financial Compliance और Cooperative Banking Governance के लिए एक बड़ा टेस्ट बन गया है। Forensic Audit की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि यह Financial Mismanagement था या संगठित Banking Scam।