Dhami Cabinet U-turns after High Court order, amendments in PTCUL MD Eligibility Rules
उत्तराखंड में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ा एक अहम प्रशासनिक फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 25 फरवरी को हुई Cabinet Meeting में ऊर्जा निगमों के Managing Director (MD) Appointment Rules में संशोधन को मंजूरी दे दी गई।
इस निर्णय के बाद अब Non-Technical Background वाले अधिकारी भी राज्य के ऊर्जा निगमों—PTCUL, UPCL और UGVNL—में MD पद संभाल सकेंगे।
PC Dhayani Case: क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला मुख्य रूप से Power Transmission Corporation of Uttarakhand Limited (PTCUL) के प्रभारी एमडी पीसी ध्यानी (PC Dhayani) से जुड़ा है।
18 फरवरी को नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) ने उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा कि मौजूदा एक्ट के अनुसार केवल Technical Qualification रखने वाला अधिकारी ही एमडी बन सकता है, जबकि ध्यानी का बैकग्राउंड गैर-तकनीकी है।
हाईकोर्ट ने एक्ट का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से पद से हटाने का आदेश दिया था।
Cabinet Amendment: Eligibility Criteria में बदलाव
ऊर्जा निगमों की ओर से सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था कि MD Eligibility Criteria में बदलाव किया जाए, ताकि केवल तकनीकी डिग्री की अनिवार्यता हटाई जा सके।
25 फरवरी की मंत्रिमंडल बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। अब:
PTCUL
Uttarakhand Power Corporation Limited (UPCL)
Uttarakhand Jal Vidyut Nigam Limited (UGVNL)
में गैर-तकनीकी अधिकारी भी MD नियुक्त किए जा सकेंगे।
यह फैसला Energy Governance और Administrative Flexibility के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
High Court ने ही सुझाया था रास्ता
गौरतलब है कि नैनीताल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि यदि सरकार उचित कारणों के साथ एक्ट में संशोधन करे, तो नियुक्ति को वैध बनाया जा सकता है।
इसी सुझाव को आधार बनाकर निगमों ने एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे अब Cabinet Approval मिल चुका है।
इस फैसले के बाद पीसी ध्यानी को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
क्या हैं इस फैसले के प्रशासनिक और राजनीतिक मायने?
Energy Sector में Policy Reform का संकेत
Technical vs Administrative Expertise पर नई बहस
High Court Order के बाद सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया
Governance Model में Flexibility बढ़ाने की कोशिश
यह निर्णय आने वाले समय में राज्य के ऊर्जा प्रबंधन (Energy Management System) और Corporate Governance ढांचे पर असर डाल सकता है।