Congress attacks: "Speech in Israeli Parliament undermines India's moral credibility"
प्रधानमंत्री Narendra Modi के इजरायली संसद Knesset में दिए गए संबोधन पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का “खुला बचाव” बताते हुए कहा कि इससे “भारत की नैतिक स्थिति कमजोर हुई है।”
मोदी का क्या था संदेश?
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने गाजा पीस इनिशिएटिव को “न्यायपूर्ण और टिकाऊ शांति” की दिशा में कदम बताया। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले की निंदा करते हुए कहा:
“आतंकवाद कहीं भी हो, शांति के लिए खतरा है… भारत इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है।”
जयराम रमेश ने नेहरू-आइंस्टीन पत्राचार का किया जिक्र
कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने पीएम के भाषण की आलोचना करते हुए भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru और वैज्ञानिक Albert Einstein के बीच 1947 के पत्राचार का हवाला दिया।
रमेश ने नेहरू के 11 जुलाई 1947 के पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि नेहरू ने लिखा था:
“मुझे यहूदियों के प्रति सहानुभूति है, लेकिन अरबों की स्थिति के प्रति भी है… समाधान तभी संभव है जब दोनों पक्ष व्यापक दृष्टिकोण अपनाएं।”
नेहरू ने यह भी कहा था कि फिलिस्तीन का मुद्दा भावनाओं और संघर्ष से घिरा हुआ है और किसी एक पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं।
इजरायली वकील का हवाला
रमेश ने इजरायल के मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील Eitay Mack की आलोचनात्मक टिप्पणी का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, पीएम का भाषण भारत की “नैतिक साख” को कम करने वाला था।
राजनीतिक बहस तेज
कांग्रेस का कहना है कि भारत की पारंपरिक विदेश नीति संतुलन और नैतिक आधार पर टिकी रही है, जबकि मोदी सरकार का रुख एकतरफा दिखता है।
दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख और रणनीतिक साझेदारी भारत के हित में है।
यह विवाद केवल एक भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की विदेश नीति की दिशा, ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान रणनीतिक प्राथमिकताओं पर व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक गलियारों में और तीखी चर्चा देखने को मिल सकती है।