अजय भट्ट की रक्षा मंत्री से अपील, हल्द्वानी और सीमा क्षेत्र की DRDO Labs बंद न हों

उत्तराखंड की रणनीतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण DIBER-DARL laboratories को लेकर उठ रही बंदी की आशंकाओं के बीच नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा सीट के सांसद अजय भट्ट ने बड़ा कदम उठाया है।

उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर यह अनुरोध किया है कि राज्य, खासकर हल्द्वानी और सीमावर्ती इलाकों में चल रही इन रक्षा अनुसंधान प्रयोगशालाओं को बंद किए जाने की आशंका को दूर किया जाए।

यह मुद्दा सिर्फ एक संस्थान के भविष्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसानों, स्थानीय युवाओं, शोधार्थियों, सीमावर्ती इलाकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े research ecosystem पर असर पड़ सकता है।

हल्द्वानी दौरे के दौरान सौंपा गया पत्र

पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री रह चुके अजय भट्ट ने बताया कि उन्होंने हाल ही में रक्षा मंत्री के हल्द्वानी दौरे के दौरान उन्हें यह पत्र सौंपा।

पत्र में उन्होंने यह चिंता जताई कि रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (DIBER) और उससे जुड़ी रक्षा अनुसंधान कृषि प्रयोगशालाओं (DARL) को धीरे-धीरे कमजोर या बंद करने जैसी चर्चाएं सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि इन प्रयोगशालाओं में अब पहले की तुलना में बहुत कम कर्मचारी बचे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

DIBER को दिल्ली के DIPAS से जोड़ने की चर्चा से बढ़ी चिंता

अजय भट्ट ने अपने पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया कि ऐसी चर्चाएं हैं कि DIBER laboratories को दिल्ली के तिमारपुर स्थित Defence Institute of Physiology and Allied Sciences (DIPAS) से जोड़ा जा सकता है।

अगर यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो इससे उत्तराखंड के पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे high altitude agriculture research और defence support research पर गंभीर असर पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों और पूर्व अधिकारियों के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चिंता देखी जा रही है।

किसानों, युवाओं और शोधार्थियों पर पड़ सकता है सीधा असर

सांसद अजय भट्ट ने कहा कि यदि इन प्रयोगशालाओं का दायरा घटाया गया या इन्हें बंद किया गया, तो इसका असर सिर्फ संस्थान तक सीमित नहीं रहेगा।

इससे सबसे पहले प्रभावित होंगे:

हिमालयी क्षेत्र के किसान
स्थानीय बेरोजगार युवा
शोध और विज्ञान से जुड़े छात्र
इंटर्नशिप और रिसर्च अवसर तलाश रहे प्रतिभाशाली अभ्यर्थी

उन्होंने कहा कि internship, Junior Research Fellowship (JRF), Senior Research Fellowship (SRF) जैसे शैक्षणिक अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं।

यानी यह मामला केवल scientific infrastructure का नहीं, बल्कि regional employment + education + innovation ecosystem का भी है।

DARL वैज्ञानिकों से किसानों को मिलती है अहम कृषि सलाह

अजय भट्ट ने खासतौर पर इस बात पर जोर दिया कि DARL के वैज्ञानिक लंबे समय से सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों को बेहद उपयोगी agricultural guidance दे रहे हैं।

इन वैज्ञानिकों की सलाह से किसान कठिन भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर खेती, सब्जी उत्पादन और बागवानी तकनीकों का लाभ ले पा रहे हैं।

अगर ये प्रयोगशालाएं कमजोर होती हैं या उनका स्थानांतरण होता है, तो स्थानीय किसान उन scientific farming inputs से वंचित हो सकते हैं, जिनसे उन्हें सीधे फायदा मिल रहा है।

1962 के चीन युद्ध के बाद महसूस हुई थी ऐसी लैब्स की जरूरत

अजय भट्ट के मुताबिक, DARL laboratories की स्थापना के पीछे एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक सोच थी।

उन्होंने बताया कि DRDO से जुड़े कई सेवानिवृत्त अधिकारियों से बातचीत में यह जानकारी सामने आई कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इन प्रयोगशालाओं की आवश्यकता महसूस की गई थी।

उस समय यह समझा गया कि सीमावर्ती और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए

स्थानीय स्तर पर अनाज और सब्जियों का उत्पादन
food self-sufficiency
और कठिन परिस्थितियों में sustainable supply support

बहुत जरूरी है।

यही कारण था कि इन प्रयोगशालाओं ने सिर्फ defence research ही नहीं, बल्कि border sustainability model के रूप में भी अहम भूमिका निभाई।

उत्तराखंड के किन इलाकों में हैं DIBER-DARL की प्रयोगशालाएं?

सांसद ने बताया कि DARL और संबंधित research labs उत्तराखंड के कई रणनीतिक और पहाड़ी इलाकों में संचालित हैं। इनमें प्रमुख स्थान हैं:

अल्मोड़ा
हल्द्वानी
पिथौरागढ़
औली
हर्षिल

इन प्रयोगशालाओं में स्थानीय भूभाग, ऊंचाई, जलवायु और सीमावर्ती जरूरतों के हिसाब से crop productivity, high altitude agriculture, horticulture, survival support systems जैसे विषयों पर शोध किया जाता है।

यानी ये सिर्फ लैब नहीं, बल्कि mountain science and defence support infrastructure का हिस्सा हैं।

अजय भट्ट का बड़ा सुझाव: बंद करने के बजाय उत्तराखंड शिफ्ट हो DIPAS

सिर्फ चिंता जताने तक सीमित न रहते हुए अजय भट्ट ने अपने पत्र में एक वैकल्पिक सुझाव भी दिया है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी तरह के restructuring की योजना बन रही है, तो पहाड़ में स्थित इन प्रयोगशालाओं को कमजोर करने के बजाय दिल्ली के तिमारपुर स्थित DIPAS को ही पिथौरागढ़, औली और हर्षिल जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में shift करने पर विचार किया जाना चाहिए।

उनका तर्क है कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों और वहां तैनात मानव संसाधन की body physiology, climate adaptation और terrain-specific research बेहतर तरीके से की जा सकेगी।

यह सुझाव border-focused scientific decentralisation के रूप में भी देखा जा सकता है।

DIBER क्या है?

DIBER (Defence Institute of Bio-Energy Research), DRDO की एक महत्वपूर्ण रक्षा प्रयोगशाला है।

यह संस्थान मुख्य रूप से भारतीय सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए

bio-energy
bio-fuel
और उनसे जुड़ी technologies व products

के development पर काम करता है।

इसका उद्देश्य कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सेना को उपयोगी और sustainable technological support देना है।

DARL क्या है?

DARL (Defence Agricultural Research Laboratory), DRDO के तहत काम करने वाली एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला है, जो खासतौर पर हिमालयी और उच्च-ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए research करती है।

इसका focus कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर रहता है, जैसे:

High Altitude Agriculture
Horticulture
Drinking Water Purification
Biological Hazard Management
Extreme Climate Food Support

यह research उन इलाकों में बेहद उपयोगी है, जहां भौगोलिक चुनौतियां सामान्य खेती और जीवन-प्रबंधन को कठिन बना देती हैं।

क्यों अहम है यह मुद्दा?

यह मामला केवल एक संस्थान या staffing issue का नहीं है।

अगर DIBER-DARL जैसी प्रयोगशालाओं का दायरा घटता है, तो इसका असर कई स्तरों पर पड़ सकता है:

संभावित असर:
सीमावर्ती क्षेत्रों की agri-research capacity कम हो सकती है
स्थानीय युवाओं के लिए research opportunities घट सकती हैं
किसानों को मिलने वाली scientific advisory support कमजोर हो सकती है
उत्तराखंड का strategic research importance प्रभावित हो सकता है
सेना से जुड़ी terrain-specific support systems कमजोर पड़ सकती हैं

इसी वजह से यह मुद्दा अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि strategic and policy level concern बनता जा रहा है।

 सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों की जरूरतों से जुड़ा है यह सवाल

सांसद अजय भट्ट की ओर से उठाया गया यह मुद्दा उत्तराखंड के सीमावर्ती और पर्वतीय इलाकों की जरूरतों को सीधे तौर पर सामने लाता है।

DIBER और DARL जैसी प्रयोगशालाएं केवल वैज्ञानिक संस्थान नहीं, बल्कि किसानों, युवाओं, शोधार्थियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े long-term support system का हिस्सा हैं।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि रक्षा मंत्रालय इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या इन प्रयोगशालाओं को लेकर उठी आशंकाओं पर कोई स्पष्ट संदेश दिया जाता है।