Gutkha and pan masala banned in Uttarakhand; Dhami government foregoes an estimated ₹40 crore in revenue for the sake of public health.
उत्तराखंड सरकार ने जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए गुटखा, पान मसाला और तंबाकू-निकोटिन युक्त प्रतिबंधित खाद्य उत्पादों की बिक्री पर एक साल के लिए रोक लगाई है। इस फैसले का असर सरकारी राजस्व के साथ-साथ इन उत्पादों के कारोबार से जुड़े व्यापारियों, वितरकों और आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ने की आशंका है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इन उत्पादों से राज्य को सालाना करीब 40 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व मिलने का अनुमान है।
जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता, कारोबार पर पड़ सकता है असर
प्रतिबंध के बाद गुटखा, पान मसाला और आदेश के दायरे में आने वाले अन्य उत्पादों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। इससे केवल खुदरा दुकानदारों ही नहीं, बल्कि थोक कारोबारियों और वितरण नेटवर्क से जुड़े लोगों पर भी असर पड़ने की संभावना है। सरकार के फैसले को जनस्वास्थ्य से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसके आर्थिक प्रभाव का वास्तविक आकलन प्रतिबंध के अनुपालन और प्रभावित उत्पादों की बिक्री के आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
राज्य और केंद्र को कितना मिलता है GST?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन उत्पादों से सालाना करीब 40 करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व मिलने का अनुमान है। इसमें लगभग 20 करोड़ रुपये राज्य और 20 करोड़ रुपये केंद्र सरकार के हिस्से में जाने की बात कही गई है। यदि प्रतिबंध के चलते इन उत्पादों की वैध बिक्री में कमी आती है, तो संबंधित कर संग्रह पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक राजस्व प्रभाव अन्य कारकों और प्रतिबंध के पालन पर निर्भर करेगा।
100 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान कैसे निकला?
बताए गए आंकड़ों के आधार पर यदि 40 करोड़ रुपये के कर संग्रह को लगभग 40 प्रतिशत की प्रभावी कर दर से जोड़कर देखा जाए, तो करीब 100 करोड़ रुपये के करयोग्य कारोबार का अनुमान निकलता है। यह एक गणितीय अनुमान है, न कि प्रतिबंध से प्रभावित होने वाले कारोबार का प्रमाणित आंकड़ा। वास्तविक कारोबार का आकार उत्पादों की अलग-अलग कर दरों, सेस, बिक्री और अन्य परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है।
तंबाकू उत्पादों पर टैक्स का गणित
तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी की दर और अतिरिक्त उपकर उत्पाद की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी उत्पादों पर कुल कर का बोझ एक समान मानना सही नहीं होगा। प्रतिबंध के आर्थिक प्रभाव का सटीक आकलन करने के लिए उत्पादवार बिक्री, लागू कर दरों और सरकारी राजस्व के विस्तृत आंकड़ों की जरूरत होगी।
उत्तराखंड सरकार के इस फैसले के बाद एक ओर जनस्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएं चर्चा में हैं, तो दूसरी ओर कारोबार और राजस्व पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में प्रतिबंध के अनुपालन और संबंधित आंकड़ों से इसके वास्तविक असर की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।