शैलजा की चिट्ठी के बाद भी नहीं रुकी हरीश रावत की यात्रा, उत्तराखंड कांग्रेस में फिर बढ़ी हलचल

उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक समन्वय को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी और AICC महासचिव कुमारी शैलजा ने आपत्ति जताई थी। 1 अक्टूबर को भेजे गए पत्र में शैलजा ने कहा कि यात्रा को लेकर न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष से चर्चा की गई थी। उन्होंने चुनाव से पहले पार्टी को एकजुट होकर काम करने की जरूरत बताते हुए रावत से ऐसे समानांतर कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था।

इसके बावजूद हरीश रावत ने अपनी यात्रा जारी रखी और 5 अक्टूबर को जसपुर से हल्द्वानी के बीच यात्रा का कार्यक्रम आगे बढ़ाया। यात्रा जसपुर से शुरू होकर काशीपुर, रामनगर और कालाढूंगी होते हुए हल्द्वानी तक पहुंची। रावत ने सोशल मीडिया पर कहा कि उत्तराखंड के स्वाभिमान और बदलाव के लिए उनका संकल्प जारी रहेगा। उनके समर्थकों का कहना है कि यह Public Outreach Programme जनता से संवाद और कांग्रेस को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व ने संगठन से समन्वय के बिना होने वाले ऐसे कार्यक्रमों पर चिंता जताई है।

इस विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल से भी रावत की बातचीत हुई है। कुमारी शैलजा ने कहा है कि रावत अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहते हैं और 7 या 8 अक्टूबर को उनसे बातचीत के बाद आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। ऐसे में फिलहाल यह मामला पार्टी संगठन और वरिष्ठ नेता के बीच Coordination and Party Discipline से जुड़ा हुआ है।

हरीश रावत के समर्थक इस यात्रा को जनता के बीच उनकी सक्रियता बढ़ाने और उत्तराखंड के मुद्दों को उठाने की पहल बता रहे हैं। वहीं कांग्रेस नेतृत्व का जोर चुनावी तैयारियों के दौरान सामूहिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक तालमेल पर है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम उत्तराखंड कांग्रेस में नेतृत्व, कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को सामने लाता है।