Ram Chandra Chhatrapati Murder Case: High Court से Gurmeet Ram Rahim बरी, लेकिन जेल से नहीं मिलेगी रिहाई

Punjab and Haryana High Court ने चर्चित Ram Chandra Chhatrapati murder case में Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim Singh को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने CBI Special Court द्वारा 2019 में सुनाई गई life imprisonment (उम्रकैद) की सजा को रद्द कर दिया।

यह फैसला Chief Justice Sheel Nagu और Justice Vikram Aggarwal की खंडपीठ ने उस अपील पर सुनाया जिसमें डेरा प्रमुख ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध evidence और prosecution arguments के आधार पर राम रहीम के खिलाफ आरोप पर्याप्त रूप से साबित नहीं हो सके।

अन्य दोषियों की सजा बरकरार

हालांकि इस मामले में अन्य तीन दोषियों Kuldeep, Nirmal Singh और Krishan Lal की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। इन सभी को पहले CBI Court ने हत्या की साजिश में शामिल मानते हुए life sentence सुनाई थी।

राम रहीम समेत सभी दोषियों ने 2019 के फैसले के खिलाफ High Court appeal दायर की थी। सुनवाई के बाद अदालत ने डेरा प्रमुख को benefit of doubt देते हुए आरोपों से मुक्त कर दिया।

फिर भी जेल में ही रहेगा Ram Rahim

इस मामले में बरी होने के बावजूद Gurmeet Ram Rahim Singh को फिलहाल जेल से रिहाई नहीं मिलेगी। वह इस समय Rohtak Sunaria Jail में बंद है और दो साध्वियों से जुड़े rape case में 20 साल की सजा काट रहा है।

यानी murder case acquittal के बावजूद अन्य आपराधिक मामलों में मिली सजा के कारण उसकी कैद जारी रहेगी।

क्या था पूरा Ram Chandra Chhatrapati Murder Case

यह मामला अक्टूबर 2002 का है, जब हरियाणा के Sirsa में स्थानीय अखबार “Poora Sach” चलाने वाले पत्रकार Ram Chandra Chhatrapati को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई थी।

इस घटना ने पूरे देश में press freedom और journalist safety को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था।

दरअसल, पत्रकार छत्रपति ने अपने अखबार में Dera Sacha Sauda और उसके प्रमुख Gurmeet Ram Rahim के खिलाफ कई रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। इन रिपोर्टों में एक anonymous letter का भी जिक्र था जिसमें डेरा के अंदर साध्वियों के साथ sexual exploitation के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

इसी खुलासे के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया और बाद में इसकी जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी गई।

2019 में CBI Court ने सुनाई थी उम्रकैद

लंबी जांच और ट्रायल के बाद January 2019 में Panchkula CBI Special Court ने राम रहीम और अन्य आरोपियों को murder conspiracy का दोषी ठहराते हुए life imprisonment की सजा सुनाई थी।

अब लगभग सात साल बाद Punjab and Haryana High Court verdict में डेरा प्रमुख को राहत मिल गई है।

परिवार ने जताई निराशा, Supreme Court जाने की तैयारी

इस फैसले पर मृतक पत्रकार के बेटे Anshul Chhatrapati ने गहरी निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके परिवार के लिए बड़ा झटका है।

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे इस मामले को Supreme Court of India में चुनौती देंगे और न्याय के लिए अपनी legal battle जारी रखेंगे।

अंशुल ने कहा कि उनके पिता की लड़ाई सीधे तौर पर Gurmeet Ram Rahim के खिलाफ थी, क्योंकि वे अपने अखबार में डेरा प्रमुख से जुड़े मामलों का खुलासा कर रहे थे।

25 साल से चल रही कानूनी लड़ाई

अंशुल छत्रपति ने बताया कि पिछले लगभग 25 वर्षों से उनका परिवार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। उनके मुताबिक किसी प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना आसान नहीं होता।

उन्होंने कहा कि भले ही High Court verdict उनके पक्ष में नहीं आया हो, लेकिन वे सभी legal options का इस्तेमाल करते हुए इस लड़ाई को आगे भी जारी रखेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला journalism, justice system और high-profile criminal trials से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों को एक बार फिर चर्चा में ले आया है।