Education Sector Reform: CM Dhami से मिला प्रतिनिधिमंडल, Fees Act की मांग तेज

उत्तराखंड में निजी स्कूलों की मनमानी (Private School Arbitrary Fee Hike) के खिलाफ अब सत्तारूढ़ दल के भीतर से भी आवाज उठने लगी है। भाजपा के प्रदेश मंत्री आदित्य चौहान ने मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami से मुलाकात कर आगामी Budget Session में Private School Fee Regulation Act लाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के निजी विद्यालयों में हर साल फीस वृद्धि (Annual Fee Hike) की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।

Education Commercialisation पर बढ़ता दबाव

आदित्य चौहान ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि शिक्षा के बाजारीकरण (Commercialisation of Education) को रोकना समय की जरूरत बन गया है। निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा मनमाने तरीके से फीस तय करने से अभिभावकों का आर्थिक शोषण (Financial Exploitation of Parents) हो रहा है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले वर्ष सरकार के हस्तक्षेप (Government Intervention) के बाद कई जिलों में प्रशासनिक स्तर पर फीस वृद्धि पर रोक लगाई गई थी। इससे लाखों अभिभावकों को बड़ी राहत (Parent Relief) मिली थी।

नए सत्र से पहले फिर बढ़ी चिंता

भाजपा नेता के अनुसार, नए Academic Session से पहले फिर से कई स्कूल प्रबंधन मनमानी फीस संरचना (Unregulated Fee Structure) लागू करने की तैयारी में हैं। ऐसे में स्थायी समाधान (Permanent Legal Framework) के रूप में Fee Regulation Law लाना जरूरी है।

Budget Session में कानून लाने की मांग

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि आगामी Budget Session में निजी विद्यालय शुल्क नियामक कानून (Private School Fee Act) को पारित किया जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि Education Quality, Transparency और Accessibility भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

क्या होगा आगे?

अब सभी की नजरें Budget Session पर टिकी हैं कि क्या Uttarakhand सरकार Fee Regulation Act को विधायी रूप देगी। यदि यह कानून लागू होता है, तो राज्य में School Fee Governance और Education Policy में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।