India's presence in the first meeting of Trump's 'Board of Peace', but why the distance from membership?
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए गठित ‘Board of Peace’ की पहली आधिकारिक बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण Gaza Peace Initiative में भारत ने सदस्य देश के रूप में नहीं, बल्कि एक Observer Country के तौर पर भागीदारी की।
बैठक में नौ देशों ने मिलकर लगभग 7 अरब अमेरिकी डॉलर के Gaza Relief Package पर सहमति जताई। साथ ही, पांच देशों ने युद्ध प्रभावित क्षेत्र में International Stabilization Force के तहत सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
भारत का प्रतिनिधित्व और भूमिका
वाशिंगटन डीसी स्थित Embassy of India, Washington, D.C. की वरिष्ठ राजनयिक नामग्या खम्पा ने बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि भारत Board of Peace का औपचारिक सदस्य नहीं बना है, लेकिन Observer के रूप में उसकी उपस्थिति को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिकी प्रशासन की घोषणा के अनुसार, अमेरिका इस Peace Board के लिए 10 अरब डॉलर का योगदान देगा। इस पहल में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित कुल 27 देश सदस्य के रूप में जुड़े हैं।
कौन-कौन से देश भेजेंगे सैनिक?
International Stabilization Force के लिए इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया ने सैनिक भेजने पर सहमति दी है। वहीं मिस्र और जॉर्डन ने स्थानीय पुलिस बल को प्रशिक्षण देने की प्रतिबद्धता जताई है।
नवगठित बल के प्रमुख मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स के अनुसार, प्रारंभिक चरण में गाजा में 12,000 पुलिसकर्मियों और 20,000 सैनिकों की तैनाती की योजना है। सबसे पहले बल की तैनाती राफा क्षेत्र में की जाएगी, जिसे रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
Trump की Peace Strategy और बड़ा दृष्टिकोण
Donald Trump ने इस अवसर पर योगदान देने वाले देशों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खर्च किया गया प्रत्येक डॉलर क्षेत्र में स्थिरता और नए भविष्य की दिशा में निवेश है। उन्होंने यह भी कहा कि Board of Peace यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है।
यह पहल Trump की 20-सूत्रीय Middle East Peace Plan का हिस्सा है। हालांकि अक्टूबर में हुए युद्धविराम के बाद इस Board की संरचना और दायरे में बदलाव की चर्चा भी सामने आई है। संकेत मिले हैं कि यह बोर्ड केवल Israel-Hamas संघर्ष तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Global Conflict Resolution में भी भूमिका निभा सकता है।
Geopolitics पर संभावित असर
Gaza Reconstruction और International Peacekeeping Initiative के इस मॉडल को अमेरिका की नई US Foreign Policy Strategy के रूप में देखा जा रहा है। भारत का Observer के रूप में शामिल होना यह दर्शाता है कि वह Middle East Diplomacy पर करीबी नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल औपचारिक सदस्यता से दूरी बनाए रखना चाहता है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भारत Board of Peace में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होता है या अपनी वर्तमान कूटनीतिक स्थिति बनाए रखता है। फिलहाल, यह पहल Middle East Stability और Global Peace Architecture के संदर्भ में एक अहम कदम मानी जा रही है।