Additional Charge Cancelled: Will Uttarakhand Power Transmission System Change?
नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिटकुल (PITCUL) के प्रबंध निदेशक (Managing Director) का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को नियमों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया है।
न्यायमूर्ति Ashish Naithani और न्यायमूर्ति Subhash Upadhyay की खंडपीठ ने इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
Government Order को दी गई थी चुनौती
यह मामला 10 सितंबर 2022 को जारी उस सरकारी आदेश से जुड़ा है, जिसमें प्रकाश चंद्र ध्यानी को Power Transmission Corporation of Uttarakhand Limited के Managing Director का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
मुख्य अभियंता Rajiv Gupta और अन्य याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी।
Rule 9-A और Engineering Qualification बना विवाद का केंद्र
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जब तक नियमित चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह पदभार सबसे वरिष्ठ और पात्र अधिकारी को दिया जाना चाहिए था।
उन्होंने तर्क दिया कि Uttarakhand Managing Director and Directors Selection Rules, 2021 के Rule 9-A के अनुसार इस पद के लिए Engineering Graduate होना अनिवार्य है।
कोर्ट में यह मुद्दा उठाया गया कि संबंधित अधिकारी के पास आवश्यक Engineering Degree Qualification नहीं है, जिससे नियुक्ति की वैधता पर सवाल खड़े हुए।
High Court का स्पष्ट रुख
खंडपीठ ने माना कि नियुक्ति प्रक्रिया में Rule 9-A का उल्लंघन हुआ है। अदालत ने कहा कि 2021 के नियमों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएं तब तक अनिवार्य रहेंगी, जब तक विधिसम्मत तरीके से छूट (legal exemption) न दी जाए।
सरकार यह साबित करने में असफल रही कि नियम 9-ए के तहत किसी प्रकार की वैध छूट प्रदान की गई थी।
नियुक्ति अवैध घोषित, सरकार को पुनर्विचार की छूट
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि किसी अन्य योग्यता को आवश्यक डिग्री के समकक्ष (equivalent qualification) माना गया था।
इसलिए अतिरिक्त प्रभार को कानूनी रूप से अमान्य घोषित कर दिया गया।
हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि सरकार इस विषय पर दोबारा विचार कर सकती है, लेकिन कोई भी नया निर्णय 2021 Selection Rules के सख्त अनुपालन में होना चाहिए।
यदि दोबारा छूट दी जाती है, तो सरकार को वस्तुनिष्ठ और दस्तावेजी आधार प्रस्तुत करना होगा और यह स्पष्ट करना होगा कि योग्यता की समतुल्यता कैसे निर्धारित की गई।
योग्यता या नेतृत्व क्षमता पर टिप्पणी नहीं
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत योग्यता, नेतृत्व क्षमता या प्रशासनिक दक्षता पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
नई नियुक्ति होने तक राज्य सरकार कानून के अनुरूप अंतरिम व्यवस्था कर सकती है।