Robot Dog Controversy at AI Impact Summit: Galgotias University Clarifies and Apologizes
India AI Impact Summit 2026 में प्रदर्शित एक Robot Dog को लेकर उठे विवाद पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि पवेलियन पर मौजूद उनकी एक प्रतिनिधि को उत्पाद की technical origin की पूरी जानकारी नहीं थी, जिसके कारण गलतफहमी की स्थिति बनी।
रजिस्ट्रार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कैमरे के सामने आने के उत्साह में प्रतिनिधि ने तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी दे दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि उन्हें मीडिया से बात करने की औपचारिक अनुमति नहीं थी। आयोजन समिति की भावनाओं का सम्मान करते हुए यूनिवर्सिटी ने समिट परिसर खाली कर दिया।
कैसे शुरू हुआ Robot Dog Controversy?
विवाद तब सामने आया जब यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने मीडिया को ‘Orion’ नाम से एक रोबोटिक डॉग दिखाते हुए दावा किया कि इसे संस्थान के Center of Excellence में विकसित किया गया है।
हालांकि, वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि यह रोबोट वास्तव में Unitree Go2 है, जिसे चीन की कंपनी Unitree Robotics द्वारा निर्मित किया गया है। इसके बाद यह मामला Innovation Authenticity और Product Attribution को लेकर चर्चा का विषय बन गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद आयोजकों ने यूनिवर्सिटी से समिट में अपनी प्रदर्शनी हटाने को कहा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया बहस
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। विपक्षी दलों ने इसे AI Credibility Issue बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए।
वहीं, सूचना प्रौद्योगिकी सचिव S Krishnan ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसी भी प्रदर्शक को दूसरे के उत्पाद को अपना मौलिक उत्पाद बताने की अनुमति नहीं देगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Abhishek Singh ने कहा कि उद्देश्य Innovation को प्रोत्साहित करना है, लेकिन misleading claims स्वीकार्य नहीं होंगे।
केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने भी कहा कि यदि किसी ने गलती की है, तो उस पर कार्रवाई की गई है, जबकि अन्य उत्कृष्ट AI Solutions को भी सराहा जाना चाहिए।
दूसरे दिन भी उठे सवाल
विवाद यहीं नहीं रुका। एक अन्य वायरल वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि ने एक Soccer Drone Project को भी संस्थान की ‘end-to-end engineering’ का परिणाम बताया। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इस ड्रोन को दक्षिण कोरिया की तकनीक बताया, जिससे चर्चा और तेज हो गई।
प्रोफेसर ने बाद में स्वीकार किया कि उत्साह में वे तथ्यों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं कर पाईं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी तकनीक के development process में शामिल होना और उसके पूर्ण निर्माण का दावा करना अलग बातें हैं।
Innovation Ethics पर बड़ा सवाल
यह पूरा प्रकरण Tech Transparency, Startup Ecosystem Credibility और AI Innovation Ethics को लेकर गंभीर बहस छेड़ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के इस दौर में accurate product representation और स्पष्ट ब्रांडिंग अत्यंत आवश्यक है।