UCOST Water Education Program: Himalayan Water Resources पर गंभीर चर्चा

उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST – Uttarakhand State Council for Science and Technology) द्वारा संचालित Water Education Program के अंतर्गत 31 जनवरी 2026 को “Water Resources of Uttarakhand: Present Status, Emerging Challenges and Sustainable Solutions” विषय पर एक महत्वपूर्ण Expert Lecture Session आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम परिषद के सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें जल संरक्षण और Sustainable Water Management पर व्यापक चर्चा की गई।

Community Participation से Water Conservation को मिलेगा बढ़ावा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि राज्य में जल स्रोतों के संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए Community Participation Model को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हिमालय से निकलने वाली नदियां, जलधाराएं और ग्लेशियर न केवल मानव जीवन बल्कि Biodiversity Sustainability के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि भविष्य की Water Security Challenges से निपटने के लिए जल स्रोतों का वैज्ञानिक विश्लेषण बेहद जरूरी है। इसी दिशा में यूकॉस्ट द्वारा ‘मां धरा नमन’ अभियान के तहत प्रदेश के 100 जल स्रोतों का Scientific Study और Conservation Project शुरू किया गया है।

UCOST Scientific Projects और Research Initiatives पर प्रकाश

कार्यक्रम के दौरान यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी.पी. उनियाल ने राज्य में संचालित विभिन्न Scientific Research Programs और Environmental Projects की जानकारी दी। वहीं कार्यक्रम संयोजक और यूकॉस्ट वैज्ञानिक डॉ. भवतोष शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विषय विशेषज्ञ का परिचय कराया।

Himalayan Water Resources और Future Water Demand पर विशेषज्ञ व्याख्यान

राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सोबन सिंह रावत ने अपने Technical Presentation में हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली नदियों के ऐतिहासिक और वर्तमान परिदृश्य पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने उत्तराखंड के Natural Springs (जल स्रोत) की वर्तमान स्थिति, जल संकट की संभावनाओं और भविष्य की Water Availability Challenges पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने बताया कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास बेहद आवश्यक हैं।

डॉ. रावत ने राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान द्वारा चलाए जा रहे Spring Rejuvenation Projects, Remote Sensing Technology, GIS Applications, और Satellite आधारित Rainfall Monitoring Systems के उपयोग के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

Students और Educational Institutions की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने Digital Projection और Online Participation के माध्यम से हिस्सा लिया। इस आयोजन में विज्ञान और पर्यावरण से जुड़े कई विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधार्थी और छात्र शामिल हुए।

कार्यक्रम में साइंस सिटी देहरादून के सलाहकार डॉ. जी.एस. रौतेला सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया। राज्य के विभिन्न जिलों से शिक्षकों, छात्रों और वैज्ञानिक संस्थानों के प्रतिनिधियों सहित करीब 300 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

Water Sustainability और Environmental Awareness को मिलेगा बढ़ावा

इस कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और Scientific Water Resource Management को मजबूत करना था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल स्रोतों का संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन समय रहते किया गया, तो भविष्य में जल संकट से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है।